सताते सताते

 सताते सताते क्यूँ रुक गये हो,

निभाते निभाते वफ़ा थक गये हो


हिजाबां हटावो कि देखे खुदा भी,

जताते जताते हया थक गये हो


पंडित आयुष्य चतुर्वेदी

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