Ya khuda
या खुदा भौंरा बना हूँ गुलशन-ए-बेदाद का,
आदतन साइल हुआ खूगर हुआ फ़रयाद का
इस तरह का इश्क़ मुमकिन हो तो' मुझसे कर सनम,
वस्ल का झगड़ा न हो सौदा न हो बेदाद का
इस कदर देखा मुझे जब कत्ल कश बनते हुए,
खून टपका आँख से दिल फट गया सय्याद का
आ सके मुझ तक सदा अब तो रहा मुमकिन नहीं,
शाद रहकर भी रहा नाशाद दिल नाशाद का
शाद रहने दो मुझे नाशादगी के साथ तुम,
खौफ़ बुलबुल का न हो नाला न हो सय्याद का
कीजिये ऐसा करम कुछ याद रक्खा जाइगा,
खौफ़ मिल्लत का न हो दिल खुश रहे नाशाद का
-पंडित आयुष्य चतुर्वेदी
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